“एपस्टीन से 3-4 बार मिला था क्योंकि….”, बोले केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राहुल गांधी को दिया जवाब

hardeep puri

फोटो क्रेडिट : आईएएनएस

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एपस्टीन फाइल से जुड़े आरोपों पर मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया जवाब, क्या बोले ?

 

नई दिल्ली | लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के सदन में दिए भाषण पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, “हमारे पास एक युवा नेता हैं, जिन्होंने आज संसद के सामने कुछ बातें रखीं. उन्हें बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत है.”

उन्होंने कहा कि दो तरह के नेता होते हैं. एक वे जो राजनीतिक व्यवस्था में जिम्मेदारी लेते हैं और अपनी जिंदगी समाज सेवा और देश को बदलने में लगा देते हैं, और यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके जीवनकाल में देश 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाए. दूसरे नेता भी होते हैं, जो कभी-कभी देश में आते हैं, और जब वे संसद में आते हैं, तो जब कोई उन्हें कोई ठोस जवाब देता है और उनकी बात नहीं सुनता, तो वे सदन से चले जाते हैं. वह आज अपनी ही स्पीच के बाद चले गए.

उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि युवा नेता को यह पता होना चाहिए कि एपस्टीन फाइल्स गलत कामों और आपराधिक मामलों से संबंधित हैं. फाइल्स में आरोप हैं कि एपस्टीन के पास एक द्वीप था, जहां वे अनैतिक काम करते थे. उन पीड़ितों ने अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज कराए हैं. मेरी बातचीत का इससे कोई लेना-देना नहीं था.

उन्होंने कहा कि नवंबर 2014 में मैं एक आम नागरिक था. किसी ने कहा कि वे भारत को देखना चाहते हैं. हमारी लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन के साथ अमेरिका के पश्चिमी तट पर एक बैठक हुई. मैंने अपने ईमेल की शुरुआत यह कहकर की कि मैं अब पहले से कहीं अधिक आश्वस्त हूं कि आज का भारत एक शानदार अवसर प्रस्तुत करता है और रीड हॉफमैन को भारत आकर आने वाले बदलावों को देखना चाहिए.

उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया को लेकर मैं नवंबर 2014 में इस बारे में बात कर रहा था. अगर मेरी याददाश्त सही है, तो यह परियोजना 2015 में शुरू हुई थी. मैं यहां एक दूरदर्शी आम नागरिक था, जो जानता था कि मोदी सरकार किस तरह का काम करने वाली है.

हरदीप पुरी ने कहा कि यही नेता 2013 में तब सुर्खियों में आए थे, जब तत्कालीन अध्यादेश को सार्वजनिक रूप से फाड़ दिया था. कुछ महीने पहले इन्हीं नेता ने दावा किया था कि ब्राजील की एक मॉडल ने भारत में कई बार वोट डाला, लेकिन बाद में पता चला कि वह बयान गलत था.

पुरी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वे संविधान की कॉपी लेकर हवा में लहराते रहे और उनका कैडर भी ऐसा करता रहा. फिर किसी ने सेलोफीन का कवर निकाल कर पूछा कि यह कौन से संविधान की कॉपी है.
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने भारत को ‘डेड इकॉनोमी’ बताया था. उन्होंने कहा, “इस शब्द का इस्तेमाल करने से पहले डिक्शनरी या कॉमन सेंस से उसका मतलब समझ लेना चाहिए. उनके बयानों में मनोरंजन वैल्यू जरूर होती है, लेकिन यह बफूनरी (हास्यास्पद व्यवहार) का हिस्सा है.”

पुरी ने यह भी बताया कि 26 नवंबर 2025 को संविधान दिवस के कार्यक्रम के दौरान संसद के सेंट्रल हॉल में राहुल गांधी उनके पास आए थे और आंख मारते हुए बोले कि आपका नाम दिलचस्प जगह पर आया है. केंद्रीय मंत्री ने कहा, “मैंने उनसे पूछा कि क्या आप सच्चाई जानना चाहेंगे? और फिर मैंने उन्हें इस बारे में जानकारी भी भेजी.”

पुरी ने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को पूरे मामले को समझाने के लिए नोट्स भेजे थे, लेकिन फिर भी संसद में उनका नाम एपस्टीन फाइल के संदर्भ में लिया गया.

एपस्टीन से मुलाकात पर सफाई

मंत्री पुरी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेफरी एपस्टीन से मुलाकात की थी, लेकिन यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहते हुए हुई थी. यह घटनाक्रम 2009 का है, जब वह न्यूयॉर्क में भारत के राजदूत थे. उन्होंने कहा, “यह सारे तथ्य पब्लिक डोमेन में हैं. लगभग तीन मिलियन ईमेल सार्वजनिक हैं. आठ साल बाद मैं मंत्री बना. आठ साल के दौरान 3-4 मुलाकातों का जिक्र है.”

उन्होंने आगे कहा कि मैंने राहुल गांधी को भेजे गए नोट्स में भी यह बताया था कि जब मैं संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत के तौर पर रिटायर हुआ था तब मुझे अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट में आमंत्रित किया गया था. मैं इंडिपेंडेंट कमीशन का जनरल सेक्रेटरी था. तब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री इस संस्थान के प्रमुख थे और वह एपस्टीन को जानते थे. तभी मेरी मुलाकातें केवल एक प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने के नाते हुई थीं और इसका किसी आरोप या विवाद से कोई संबंध नहीं है.

पुरी ने कहा कि एपस्टीन से जुड़े केवल एक-दो ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था. उन्होंने बताया कि उनके एक संपर्क ने उन्हें लिंक्डइन के रीड हॉफमैन से मिलवाया था.

पुरी ने कहा, “मैंने उस ईमेल में लिखा था कि भारत इंटरनेट आधारित आर्थिक गतिविधियों के लिए शानदार अवसर प्रस्तुत करता है. मैंने ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का भी जिक्र किया था. जब मैंने यह लिखा, तब मैं एक निजी नागरिक था, सरकारी अधिकारी नहीं.”

पुरी ने दोहराया कि एपस्टीन से उनकी मुलाकात केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के तहत हुई थी और इसका किसी भी प्रकार के आरोपों से कोई संबंध नहीं है.

 


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