कारगिल युद्ध और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नायकों में शामिल, एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ

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फाइल फोटो: आईएएनएस

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कारगिल युद्ध और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नायकों में शामिल, अब राम मंदिर ट्रस्ट के नए सीईओ

 

अयोध्या | श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है. इस पद के लिए लंबे समय से चयन प्रक्रिया चल रही थी, जिस पर अब अंतिम मुहर लग गई है.

बताया जा रहा है कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में नए सीईओ की नियुक्ति पर विस्तार से चर्चा की गई. इसके बाद योग्य और अनुभवी उम्मीदवार की तलाश शुरू हुई. ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए कई वरिष्ठ अधिकारियों ने आवेदन किया था, लेकिन अंततः रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का चयन किया गया.

जानकारी के अनुसार, भारतीय वायु सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद एयर मार्शल (रिटायर्ड) जितेंद्र मिश्रा को 5,000 से अधिक आवेदकों में से चुनकर राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया है.

जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों में गिने जाते हैं. 6 दिसंबर 1986 को वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त करने वाले मिश्रा नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए), एयर फोर्स एकेडमी और एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल के पूर्व छात्र हैं. उन्होंने अमेरिका के अलबामा स्थित एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है.

1 जनवरी 2025 को उन्होंने भारतीय वायु सेना की वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाला था. अपने 38 वर्षों से अधिक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ नियुक्तियों पर कार्य किया.

वह एक फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं. उनके पास 3,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है. उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन कमांडर, चीफ टेस्ट पायलट, एयर मुख्यालय में विभिन्न वरिष्ठ पदों तथा डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) के रूप में भी सेवाएं दी हैं.

इसके अलावा, भारतीय वायु सेना के महत्वपूर्ण अभियानों के दौरान भी उन्होंने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई. स्वतंत्रता दिवस 2025 पर उन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उनकी भूमिका के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था. इससे पहले उन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल भी मिल चुका है.

कारगिल युद्ध के दौरान जितेंद्र मिश्रा ने मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को संचालन में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. बाद में इन बमों का इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के तहत टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे रणनीतिक ठिकानों पर हमलों में किया गया.

अपने वरिष्ठ पदों पर रहते हुए उन्होंने एयर मुख्यालय में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के निदेशक, असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स), एएसटीई के कमांडेंट तथा डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं. बाद में उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) की जिम्मेदारी भी संभाली. वह 30 अप्रैल 2026 को भारतीय वायु सेना से रिटायर हुए. उन्होंने 1 जनवरी 2025 से अपनी रिटायरमेंट तक वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर सेवा दी.

By IANS

 


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