हर रोज फटती धरती…, धंसते मकान…, दरारों से निकलने वाली जहरीली गैस और आग के बीच दहशत में रहने को मजबूर हजारों परिवार…., जानें पूरा मामला ?

DHANBAAD (1)

फोटो: आईएएनएस

The Hindi Post

हर रोज फटती धरती…, धंसते मकान…, दरारों से निकलने वाली जहरीली गैस और आग के बीच दहशत में रहने को मजबूर हजारों परिवार…., जानें पूरा मामला ?

 

धनबाद |  घर के भीतर परिवार सो रहा हो और अचानक धरती के नीचे से जोरदार धमाका सुनाई दे। कुछ ही क्षणों में दीवारों में दरारें पड़ने लगें, फर्श खिसक जाए और देखते-देखते मकान का एक हिस्सा जमीन के भीतर समा जाए। बाहर निकलें तो सामने गहरा गोफ और उसमें से उठती जहरीली गैस। कहीं आग की लपटें हैं, कहीं धुआं और कहीं जमीन पर उभरती लंबी दरारें। धनबाद के कोयलांचल में इन दिनों जिंदगी कुछ ऐसी ही दहशत के बीच गुजर रही है।

दरअसल, धनबाद के कोयलांचल में जमीन के भीतर कोयले में लगी 100 साल से अधिक पुरानी आग इस संकट की बड़ी वजहों में है। इस साल जनवरी से अब तक कोयलांचल में भू-धंसान और गोफ बनने की 45 से अधिक छोटी-बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अगस्त और सितंबर में बारिश के साथ घटनाओं की रफ्तार बढ़ी है। पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम इस संकट की गंभीरता बताने के लिए काफी हैं।

31 अगस्त को लिलोरी पथरा में जमीन धंसने से एक घर का हिस्सा गोफ में समा गया। 1 सितंबर को गोधर छह नंबर में गहरे गोफ की भराई शुरू करनी पड़ी, जबकि कतरास क्षेत्र में कैलूडीह में गोफ और गैस रिसाव की घटनाएं सामने आईं। 3 सितंबर को बरारी छह नंबर में जोरदार धमाके के साथ जमीन फटी और दरारों से आग की लपटों के साथ जहरीला धुआं निकलने लगा। 4 सितंबर को कुर्मी डीह में दो बड़े गोफ बने और गैस रिसाव की सूचना से लोगों में दहशत फैल गई।

केंद्र और राज्य सरकारों, कोयला कंपनियों तथा नियामक संस्थाओं के तमाम प्रयासों और दावों के बावजूद भूमिगत आग, भू-धंसान और गोफ बनने की घटनाएं थमने के बजाय गंभीर होती जा रही हैं। इसी गंभीर स्थिति के बीच प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को धनबाद कोयलांचल का दो दिवसीय दौरा किया। उन्होंने बीसीसीएल की खनन गतिविधियों, झरिया में भूमिगत आग और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने पुनर्वासित परिवारों से बातचीत भी की और प्रभावित लोगों के सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

आलम यह है कि झरिया, कतरास, लोदना, केंदुआडीह और बाघमारा के कई इलाकों में लोगों को हर वक्त यह डर सताता है कि अगली बार धरती कहां फटेगी। हाल के दिनों में एक के बाद एक घटनाओं ने प्रशासन और खनन प्रबंधन के सामने गंभीर सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। इस साल सबसे भयावह घटना 6 अगस्त को कतरास के छाताबाद में हुई, जहां भू-धंसान से 20 से अधिक मकान प्रभावित हुए और कई लोग घायल हुए। कई घरों में गहरी दरारें पड़ गईं।

स्थानीय लोगों ने इसके लिए खनन क्षेत्र में हो रही भारी ब्लास्टिंग को जिम्मेदार ठहराया। घटना के बाद प्रशासन और खान सुरक्षा नियामक ने सख्ती दिखाई। धनबाद के उपायुक्त ने 14 अगस्त को वैज्ञानिक अध्ययन और सुरक्षा आकलन पूरा होने तक प्रभावित क्षेत्र में ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया। इसके बाद खान सुरक्षा महानिदेशालय ने न्यू आकाशकिनारी कोलियरी में नियंत्रित डीप-होल ब्लास्टिंग की अनुमति भी वापस ले ली। लेकिन छाताबाद अकेला मामला नहीं है। लोदना, बरारी, केंदुआडीह और कतरास के दूसरे इलाकों में भी जमीन धंसने, गोफ बनने और गैस रिसाव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

हाल की घटनाओं ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि क्या मौजूदा सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्था इस बढ़ते खतरे का सामना करने के लिए पर्याप्त है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोयलांचल की समस्या सिर्फ बारिश या किसी एक घटना का नतीजा नहीं है। दशकों के भूमिगत खनन, छोड़ी गई पुरानी खदानों, भूमिगत आग और जमीन के भीतर बने खाली हिस्सों ने स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। मानसून में बारिश का पानी इन कमजोर हिस्सों तक पहुंचता है तो ऊपर की मिट्टी और सतह का आधार कमजोर हो जाता है। कई जगह भारी ब्लास्टिंग से पैदा होने वाले कंपन से खतरा और बढ़ने की आशंका रहती है।

जब कोयलांचल में एक ओर जमीन धंसने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, तब दूसरी ओर वर्षों से चले आ रहे पुनर्वास अभियान की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती जमीन पर रहने वाले लोगों की सुरक्षा और उनका समय पर पुनर्वास है। जिन परिवारों के घरों में दरारें आ चुकी हैं, उनके लिए हर बारिश और हर तेज धमाका संभावित खतरे की घंटी है।

बीसीसीएल के तकनीकी एवं संचालन निदेशक संजय कुमार सिंह कहते हैं, ‘भू-धंसान और गैस रिसाव से प्रभावित केंदुआडीह और लोदना जैसे क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित आवास देना प्राथमिकता है। संशोधित झरिया मास्टर प्लान के तहत 5,940 करोड़ रुपये की राशि से जेआरडीए के साथ मिलकर बेलगड़िया और कर्माटांड़ टाउनशिप में विस्थापितों के पुनर्वास और उनकी आजीविका की व्यवस्था तेज की जा रही है।’

बहरहाल, धनबाद के कोयलांचल में अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अगला गोफ कब बनेगा। असली सवाल यह है कि अगली बार जब धरती फटेगी तो उसकी जद में कौन होगा।

BY IANS

धनबाद : हर रोज फट रही धरती, धंस रहा कोयलांचल, 8 महीने में 45 से ज्यादा घटनाएं


The Hindi Post

You may have missed

error: Content is protected !!