आखिरी मुगल बादशाह के परपोते की विधवा ने हाई कोर्ट से मांगा लाल किले का स्वामित्व, जाने कोर्ट ने क्या कहा?
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दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर द्वितीय के परपोते की विधवा ने लाल किले का स्वामित्व प्रदान करने का अनुरोध किया था. महिला का दावा था कि वह बहादुर शाह जफर द्वितीय के परपोते की विधवा है.
सुल्ताना बेगम ने एकल न्यायाधीश के दिसंबर 2021 के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने 2021 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया.
पीठ ने कहा कि यह अपील ढाई साल से अधिक की देरी के बाद दायर की गई है जिसे माफ नहीं किया जा सकता.
महिला द्वारा दायर याचिका के अनुसार, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनकी पारिवारिक संपत्ति छीन ली थी. इसके बाद अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को देश से निर्वासित कर दिया गया था. लाल किले पर मुगलों का कब्जा इस कारण छिन गया था.
याचिकाकर्ता महिला ने लाल किले पर कब्जा (मालिकाना हक) या सरकार द्वारा 1857 से लेकर आज तक के ‘अवैध कब्जे’ के लिए उचित मुआवजा या कोई अन्य राहत मांगी थी.
पिछली सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की एकल पीठ ने कहा था: “मेरा इतिहास बहुत कमजोर है, लेकिन आप दावा करती हैं कि 1857 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने आपके साथ अन्याय किया था. 150 साल से ज्यादा की देरी क्यों हुई? आप इतने सालों तक क्या कर रही थी?”
न्यायमूर्ति पल्ली ने यह भी कहा था कि इस दावे का समर्थन करने के लिए कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है कि याचिकाकर्ता महिला अंतिम मुगल सम्राट से संबंधित थी.
Reported By: IANS, Written By: Hindi Post Web Desk
