आजमगढ़ में सनसनीखेज वारदात: पुरोहितों और पत्नी की हत्या कर बच्चों को बनाया बंधक, आधी रात को मुठभेड़ में मारा गया आरोपित

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आजमगढ़ में सनसनीखेज वारदात: पुरोहितों और पत्नी की हत्या कर बच्चों को बनाया बंधक, आधी रात को मुठभेड़ में मारा गया आरोपित

 

अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव से मंगलवार शाम दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई. घर में चल रहे पूजा-पाठ के विरोध में एक शख्स ने अपनी पत्नी और अनुष्ठान करा रहे दो पुरोहितों की लाइसेंसी रिवाल्वर से गोली मारकर हत्या कर दी. तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपित ने अपने तीन मासूम बच्चों संग खुद को घर के एक कमरे में बंद कर लिया. करीब सात घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद देर रात एटीएस और पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में आरोपित ढेर हो गया, जबकि तीनों बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया.

पूजा को लेकर चल रहा था विवाद

स्थानीय लोगों के अनुसार, शंभूपुर गहजी निवासी अरविंद सिंह की मां शमला देवी और पत्नी बबीता घर में सुख-शांति के लिए अनुष्ठान कराना चाहती थीं. अरविंद इसका लगातार विरोध कर रहा था, जिसे लेकर परिवार में पिछले कई दिनों से कलह चल रही थी. इसी बीच अरविंद किसी काम से बाहर गया, तो परिजनों ने घर में पांच दिवसीय पूजा शुरू करा दी. मंगलवार को अनुष्ठान का चौथा दिन था. शाम करीब 6 बजे अरविंद अचानक घर लौटा और पूजा होते देख आपा खो बैठा.

विवाद, वीडियो और ताबड़तोड़ फायरिंग

अरविंद ने पूजा करा रहे पुरोहित महेंद्र पाठक (60), अखिलेश मिश्रा (50) और उनके पुत्र हिमांशु मिश्रा (20) को ढोंगी बताते हुए पहचान पत्र मांगना शुरू कर दिया और गाली-गलौज करने लगा. पत्नी और मां ने बीच-बचाव की कोशिश की तो पुरोहितों ने भी विरोध जताया. आरोप है कि इस दौरान जब पुरोहित मोबाइल से विवाद का वीडियो बनाने लगे, तो अरविंद गुस्से में घर के अंदर से अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर निकाल लाया.

उसने सबसे पहले पत्नी बबीता पर गोली चलाई और फिर दोनों पुरोहितों—महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा को भी गोलियों से भून दिया. तीनों की मौके पर ही मौत हो गई. फायरिंग होते ही हिमांशु मिश्रा, अरविंद की भतीजी वर्षा, रिया और मां शमला देवी जान बचाकर बाहर की तरफ भागे और शोर मचाया.

मासूमों को बनाया ढाल, देर रात मुठभेड़ में ढेर

वारदात के बाद अरविंद अपने 8 वर्षीय बेटे शौर्य, 9 वर्षीय बेटी परी और छह माह की दुधमुंही बच्ची को लेकर एक कमरे में बंद हो गया. सूचना मिलते ही डीआईजी सुनील कुमार सिंह, एसएसपी डॉ. अनिल कुमार समेत छह थानों की फोर्स मौके पर पहुंची और पूरे मकान की घेराबंदी कर ली. कमरे के भीतर मासूम बच्चों की मौजूदगी के कारण पुलिस बेहद सतर्कता बरतते हुए कई घंटों तक उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाती रही.

देर रात करीब 12:55 बजे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए एटीएस और पुलिस की संयुक्त टीम ने ऑपरेशन शुरू किया. इस दौरान हुई मुठभेड़ में आरोपित अरविंद सिंह को कई गोलियां लगीं. पुलिस उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने तीनों बच्चों को सकुशल बाहर निकाल लिया है.


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