“….. उस समय प्रधानमंत्री नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था कि अगर संविधान ….., लोक सभा में बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

PM Modi In Lok Sabha IANS (1)
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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को लोकसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कांग्रेस पर संविधान की हत्या करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आपातकाल का पाप देश की सबसे पुरानी पार्टी के माथे से कभी नहीं मिट सकता. उन्होंने कहा कि पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर गांधी परिवार की हर पीढ़ी ने सत्ता में रहते हुए संविधान से छेड़छाड़ की है.

पीएम मोदी ने “भारतीय संविधान की 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा” पर सदन में दो दिन की चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि आज संविधान के 75 साल पूरे हो रहे हैं लेकिन अगर हम पीछे मुड़कर देखें तो जब संविधान के 25 साल पूरे हो रहे थे तब आपातकाल लगाया गया था. संवैधानिक अधिकारों को नकार दिया गया था और देश को एक बड़ी जेल में बदल दिया गया था.

उन्होंने कहा, “कांग्रेस के माथे से आपातकाल का पाप कभी नहीं मिट सकता.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब इसी सदन में उन्होंने 26 नवंबर को संविधान दिवस का जश्न मनाने का सुझाव दिया था तो एक वरिष्ठ सदस्य ने उसकी आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 26 जनवरी तो है ही.

कांग्रेस और विशेष रूप से गांधी-नेहरू परिवार पर जबरदस्त हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह किसी का व्यक्तिगत अपमान नहीं करना चाहते लेकिन तथ्यों को देश के सामने रखा जाना चाहिए. कांग्रेस के एक परिवार ने संविधान को नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. पिछले 75 साल में से 55 साल इस परिवार ने देश पर राज किया है.

उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान कई राजनीतिक दलों के नेताओं को जेल भेजा गया था लेकिन अब कांग्रेस से हाथ मिलाना उनकी मजबूरी है. आपातकाल के दौरान लोगों के अधिकार छीन लिए गए थे. हजारों नागरिकों को जेलों में डाल दिया गया, न्यायपालिका को खामोश कर दिया गया और प्रेस की स्वतंत्रता पर ताला लगा दिया गया था.

पीएम मोदी ने आगे कहा कि न्यायमूर्ति एचआर खन्ना जिन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ उनके निर्वाचन के मामले में फैसला सुनाया था, उनके क्रोध का निशाना बने. वरिष्ठता के आधार पर उन्हें सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश बनना चाहिए था लेकिन जानबूझकर मुख्य न्यायाधीश के पद से वंचित कर दिया गया था. यह संविधान और लोकतंत्र की घोर उपेक्षा थी.

कांग्रेस के शासनकाल की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री नेहरू ने मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा था कि अगर संविधान हमारे लिए बाधा बनता है तो हमें उसमें बदलाव लाना चाहिए.

पीएम ने कहा, “हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि देश चुप नहीं बैठा. राष्ट्रपति और स्पीकर ने पं. नेहरू को चेतावनी दी थी और उन्हें रोकने की कोशिश की थी लेकिन पं. नेहरू ने ‘अपने संविधान’ का पालन किया.”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को संविधान से छेड़छाड़ करने की आदत पड़ गई और उन्होंने इसे बार-बार दोहराया. छह दशकों में संविधान को 75 बार बदला गया. पहले प्रधानमंत्री ने जो बीज बोया था, उसे इंदिरा गांधी ने आगे बढ़ाया. साल 1971 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनदेखी करते हुए उन्होंने संविधान में बदलाव करके न्यायपालिका के पर कतर दिए थे और संसद को पूरी शक्ति दे दी थी.

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए वोट बैंक की राजनीति के लिए संविधान में संशोधन किया और यह संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन था. परिवार की अगली पीढ़ी भी संविधान से छेड़छाड़ करने में लगी हुई है. कांग्रेस ने हर कदम पर संविधान की अवहेलना की है.

उन्होंने कहा कि लोग अनुच्छेद 370 के बारे में जानते हैं, लेकिन धारा 35ए के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. उन्होंने इसे संसद में लाए बिना ही लागू कर दिया.

पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के प्रति भी द्वेष रखा था. जब अटल बिहारी वाजपेयी सत्ता में थे तो सरकार ने उनके सम्मान में एक स्मारक बनाने का फैसला किया था. इसके बाद यूपीए के 10 साल के शासन में भी वह स्मारक नहीं बन सका. जब 2014 में एनडीए की सरकार एक बार फिर सत्ता में आई तो हमने सुनिश्चित किया कि अलीपुर रोड पर स्मारक बनाया जाए.

पीएम मोदी ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति से ग्रस्त लोगों ने आरक्षण के साथ भी खिलवाड़ किया, जिसके कारण इस देश में एससी, एसटी और ओबीसी लोगों को उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ा. जब डॉ. अंबेडकर ने आरक्षण की मांग की थी तब कांग्रेस ने शुरू में इसका विरोध किया था. कांग्रेस की सरकारों ने मंडल आयोग की रिपोर्ट की अवहेलना की. जब कांग्रेस सरकार हटी, तभी पिछड़ा वर्ग आयोग बना. जब संविधान बनाया जा रहा था, तब संविधान सभा में इस बात पर बहस हुई थी कि धार्मिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए या नहीं. यह तय हुआ कि ऐसा कदम देश की एकता के लिए हानिकारक होगा. लेकिन अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए कांग्रेस ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

आईएएनएस

 


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