1 नवंबर से शराब की दुकानों पर भुगतान के बदले नियम, अनिवार्य रूप से करना होगा यह काम….
सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)
1 नवंबर से शराब की दुकानों पर भुगतान के बदले नियम, अनिवार्य रूप से करना होगा यह काम….
चेन्नई | 1 नवंबर से तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टैसमैक) आउटलेट्स पर 1,000 रुपये से अधिक की शराब खरीदने वाले ग्राहकों को डिजिटल भुगतान करना होगा। निगम ने अधिक कीमत वसूलने की समस्या से निपटने और वित्तीय जवाबदेही को मजबूत करने के लिए अपनी 4,048 खुदरा दुकानों पर चरणबद्ध तरीके से भुगतान सुधार लागू करने का फैसला किया है।
1 जनवरी 2027 से 500 रुपये से अधिक की खरीदारी के लिए डिजिटल भुगतान अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य दुकानों पर नकद लेनदेन को कम करना और ऐसे ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी का पता लगाया जा सके और ग्राहकों की शिकायतों के समाधान में मदद मिल सके।
सोमवार को जारी एक सर्कुलर में इन नए नियमों की जानकारी देते हुए टासमैक के प्रबंध निदेशक के. नंथकुमार ने जिला प्रबंधकों को निर्देश दिया कि वे दुकानों को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए तैयार करें। यूपीआई, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के जरिए होने वाले भुगतान, निगम के अधिकृत बैंक खाते से जुड़ी ‘पॉइंट-ऑफ-सेल’ मशीनों के माध्यम से ही किए जाने चाहिए।
कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राहकों से भुगतान के लिए अपनी निजी यूपीआई आईडी, व्यक्तिगत क्यूआर कोड या निजी बैंक खातों का इस्तेमाल न करें। इस निर्देश के अनुसार, हर डिजिटल ट्रांजैक्शन एक अधिकृत भुगतान प्रणाली के जरिए ही होना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बिक्री से प्राप्त राशि सीधे निगम के खाते में पहुंचे।
निगम ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ाने के पीछे कई कारण बताए हैं, जैसे कि बड़ी मात्रा में नकद संभालने से जुड़े जोखिम, अकाउंटिंग में गड़बड़ी की संभावना और कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ।
नकद पर निर्भरता कम करने का मकसद इन परिचालन संबंधी समस्याओं को दूर करना और दैनिक बिक्री में पारदर्शिता लाना है। यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया है, जिनमें कहा गया था कि ग्राहकों से शराब की बोतलों के लिए उनके अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं।
निर्देशों के अनुसार, कर्मचारियों को हर खरीदारी के लिए बिल देना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि ली गई रकम लागू एमआरपी के बराबर हो। जिला प्रबंधकों को यह जांचना होगा कि पीओएस मशीनें ठीक से काम कर रही हैं या नहीं और कर्मचारियों के लिए डिजिटल भुगतान करने तथा लेन-देन का मिलान करने के संबंध में प्रशिक्षण की व्यवस्था करनी होगी। दुकानों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे 2×3 फीट का एक नोटिस लगाएं, जिसमें ग्राहकों को भुगतान की व्यवस्था के बारे में बताया गया हो।
सुपरवाइजरों की यह जिम्मेदारी है कि वे अधिक पैसे वसूलने की शिकायतों और नियमों के उल्लंघन को तुरंत जिला प्रबंधकों के ध्यान में लाएं। यह रिपोर्टिंग प्रक्रिया उस निगरानी तंत्र का हिस्सा है, जिसे पूरे रिटेल नेटवर्क में लागू किया जा रहा है।
जिला प्रबंधकों और ‘टासमैक’ के मुख्यालय के अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के जरिए इस व्यवस्था के लागू होने की समीक्षा की जाएगी। इस सर्कुलर का पालन हो रहा है या नहीं और आउटलेट्स पर भुगतान प्रणाली कैसे काम कर रही है, यह देखने के लिए हर महीने निगरानी रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया गया है। अगर ग्राहकों से ज्यादा पैसे वसूले जाते हैं या कोई अन्य अनियमितता होती है, तो वे ‘टासमैक’ की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800 889 2015 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं, ताकि निगम इस पर ध्यान दे सके और आगे की कार्रवाई कर सके।
BY IANS
तमिलनाडु में शराब की दुकानों पर 1 नवंबर से डिजिटल भुगतान अनिवार्य होगा
