समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर रोका गया, क्या है यह मामला ?
कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन की फाइल फोटो / (क्रेडिट : आईएएनएस)
समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर रोका गया, क्या है यह मामला ?
सहारनपुर | सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी एक मस्जिद पर शनिवार को प्रशासन की ओर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई. भारी पुलिस बल की मौजूदगी में छह बुलडोजर लगाकर मस्जिद गिराई गई. प्रशासन की ओर से यह कार्रवाई जिला अदालत के फैसले के बाद की गई है. इस मामले को लेकर नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई है.
कार्रवाई का विरोध कर रहीं कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन को सहारनपुर जाने से पहले उनके आवास पर रोक दिया गया. सांसद ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए सवाल उठाया कि क्या निर्वाचित जनप्रतिनिधि को अधिकारियों से मिलने से भी रोका जा सकता है.
पुलिस से बातचीत करते हुए इकरा हसन का वीडियो सामने आया है. पुलिसकर्मी उनसे यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं जिस पर इकरा हसन ने पूछा कि हमको किस वजह से रोका जा रहा है. इस दौरान इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बातचीत भी हुई. इकरा हसन ने कहा कि उनका सवाल सरकार और प्रशासन से है कि क्या एक निर्वाचित सांसद को अपने क्षेत्र की जनता से जुड़े किसी विषय पर अधिकारियों से मिलना भी अपराध हो गया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता.
इस दौरान इकरा हसन की मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन भी उनके आवास पर मौजूद रहीं. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका परिवार किसी दबाव से डरने वाला नहीं है और वे लोगों की सेवा के लिए राजनीति में हैं. सहारनपुर जाने से रोके जाने के बाद इकरा हसन ने भी स्पष्ट किया कि वह जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से बात करने के लिए जा रही थीं. उन्होंने कहा कि एक सांसद को इस तरह रोकना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है.
वहीं, प्रशासन की कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए है. मौके पर पुलिस के अलावा पीएसी और आरआरएफ के जवानों को तैनात किया गया है. किसी भी व्यक्ति को मस्जिद के आसपास जाने की अनुमति नहीं दी गई है. अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस और अपील समेत सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं.
सपा एमएलसी शाहनवाज खान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “पिछले महीने 17 तारीख को सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से एक फैसला दिया गया था जिसमें इस मस्जिद को अवैध बताकर कुछ फाइन लगा दिया गया था. हमारे जिम्मेदार लोग कोर्ट गए और उनको स्टे मिला. इसके बाद स्थिति सामान्य चल रही थी. सिटी मजिस्ट्रेट को सही मानते हुए कार्रवाई कर दी गई. हायर कोर्ट में चैलेंज देने के लिए फैसले में 30 दिनों के लिए रिलीफ दी गई थी. आज अचानक बात सामने आ रहे हैं कि मस्जिद को शहीद किया जा रहा है.”
सपा एमएलसी शाहनवाज खान ने कहा कि हम लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे तो दोनों दरवाजे बंद थे और वहां अलग-अलग अफवाहें उड़ रही थीं. उस वक्त वहां उतनी फोर्स नहीं थी जितनी अब बताई जा रही है. मैंने जिलाधिकारी से बात की तो उन्होंने मुझे अपने आवास पर बुलाया. हम सभी लोगों ने डीएम से मुलाकात की और अपनी शंका जाहिर की. मेरी सबसे अपील है कि शहर की मोहब्बत को बचाना सबसे जरूरी है. जिलाधिकारी ने हम लोगों को आश्वासन दिया कि जो भी होगा वो कानून के दायरे में होगा.
पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि मस्जिद पक्ष जिला अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में था लेकिन उससे पहले ही प्रशासन ने ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया.
सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, जिला अदालत से अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने मस्जिद हटाने की कार्रवाई शुरू की. उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले नोटिस, सुनवाई और अपील की प्रक्रिया पूरी की गई है और इसी के बाद ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया गया. ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले शुक्रवार रात यह अफवाह फैल गई थी कि प्रशासन मस्जिद को गिराने पहुंचने वाला है. इसके बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए. सूचना मिलने पर प्रशासन और पुलिस की टीम वहां पहुंची और लोगों को हटाया.
बता दें कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने जिलाधिकारी से शिकायत कर मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी. शिकायत में मस्जिद परिसर में बने कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का भी आरोप लगाया गया था. इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर मामले की जांच कराई गई. प्रशासन का दावा है कि जांच में निर्माण सरकारी जमीन पर पाया गया.
इसके बाद 24 मार्च 2025 को नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में कार्रवाई के लिए याचिका दाखिल की गई. नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने 16 जुलाई 2026 को मस्जिद को अवैध निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया. साथ ही कब्जेदारों से 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने के निर्देश दिए गए और उन्हें 30 दिन का समय दिया गया. मस्जिद पक्ष ने नगर मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को जिला अदालत का रुख किया था. मामले की सुनवाई के बाद 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी.
By IANS
सहारनपुर : मस्जिद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर नेताओं की प्रतिक्रिया, इकरा हसन बोलीं- हमारी आवाज दबाई नहीं जा सकती
