स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Swami Avimukteshwaranand Swami IANS

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की फाइल फोटो (आईएएनएस)

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

 

नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज के ‘पॉक्सो’ मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दी है. अदालत ने नाबालिगों के यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी पर तत्काल गिरफ्तारी का खतरा टल गया है.

दरअसल, यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के साथ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं भी लगाई गई हैं. शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगियों ने नाबालिग बटुकों का यौन शोषण किया था.

प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर 21 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी. इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था.

25 मार्च 2026 को न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका मंजूर कर ली थी. कोर्ट ने एफआईआर में कई विसंगतियां पाईं. पीड़ितों ने घटना 18 जनवरी को बताई, जबकि शिकायतकर्ता ने पुलिस को 24 जनवरी को सूचना दी. देरी का कारण पूजा-यज्ञ बताया गया, जिस पर कोर्ट ने सवाल उठाए. चिकित्सा रिपोर्ट में नाबालिगों के शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले.

कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर हैं, लेकिन प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री और प्रारंभिक जांच के आधार पर आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं दिखाई देते. जमानत की शर्तों में जांच में पूर्ण सहयोग करना, बिना अनुमति देश छोड़कर न जाना और गवाहों को प्रभावित न करना शामिल है.

शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. उन्होंने विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर कर दलील दी कि पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत केवल दुर्लभ परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए. उन्होंने नाबालिगों की सुरक्षा और गवाहों को प्रभावित किए जाने की आशंका भी जताई.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया. न्यायाधीशों ने हाईकोर्ट के विस्तृत आदेश और मामले के तथ्यों पर संतोष व्यक्त किया. कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत की शर्तों का पालन सुनिश्चित किया जाए और जांच निर्बाध रूप से जारी रहे.

 


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