33 मासूमों से दरिंदगी की रूह कंपा देने वाली दास्तां: दरिंदे इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी की सजा

Story By Live Law, Written By Hindi Post Web Desk

सांकेतिक तस्वीर

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33 मासूमों से दरिंदगी की रूह कंपा देने वाली दास्तां: दरिंदे इंजीनियर और उसकी पत्नी को फांसी की सजा

 

बांदा (उत्तर प्रदेश) की विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने एक बेहद चौंकाने वाले मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट ने सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को 33 बच्चों के यौन उत्पीड़न का दोषी करार देते हुए मृत्युदंड (फांसी की सजा) दिया है.

सीबीआई (CBI) के एक अधिकारी के अनुसार, अदालत ने इसे “अक्षम्य क्रूरता” और “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” (दुर्लभ से दुर्लभतम) मामला करार दिया है.

मामले का विवरण –
दोषी: उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग में कार्यरत जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती.

अपराध: आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (IPC) और पॉक्सो एक्ट, 2012 की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया गया. इनमें अप्राकृतिक अपराध, गंभीर यौन हमला, बच्चों का पोर्नोग्राफी के लिए उपयोग, बाल पोर्नोग्राफी सामग्री का भंडारण, उकसाना और आपराधिक साजिश रचना शामिल है.

पीड़ित: इस मामले में कुल 33 बच्चों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई है.

अदालत ने अपने फैसले में इस कृत्य को मानवीयता के प्रति घोर अपराध माना है.

ट्रायल जज (सुनवाई करने वाले न्यायाधीश) ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि कई जिलों के बच्चों को निशाना बनाया गया था. दोषियों के आचरण को अत्यधिक नैतिक पतन माना गया जिसका अर्थ है कि यह समाज के बुनियादी मूल्यों और नैतिकता के खिलाफ एक क्रूर प्रहार था.

कोर्ट के अनुसार, यह अपराध इतना घृणित है कि दोषियों के सुधरने की कोई भी उम्मीद न्याय की दृष्टि में शून्य है. कोर्ट का मानना है कि न्याय के उद्देश्य को पूरा करने के लिए मृत्युदंड ही एकमात्र उचित सजा है.

सीबीआई (CBI) ने अपने आधिकारिक बयान में इस भयानक अपराध के पीछे की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए कहा, “दोषी जूनियर इंजीनियर, जिसने एक दशक से भी अधिक समय तक इन अपराधों को अंजाम दिया, वह बच्चों को ऑनलाइन वीडियो गेम, पैसे और उपहारों का लालच देकर अपने जाल में फंसाया करता था.”

विशेष पॉक्सो कोर्ट ने अपने फैसले में इस अपराध की वीभत्सता को रेखांकित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है. कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया कि अभियुक्तों के घर से बरामद की गई समूची नकदी को सभी पीड़ितों में बराबर-बराबर बांट दिया जाए.

सीबीआई ने 31 अक्टूबर 2020 को रामभवन और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण, पोर्नोग्राफी के लिए बच्चों का उपयोग करने और इंटरनेट पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) बनाने और उसे फैलाने के आरोपों में मामला दर्ज किया था.

जांच के दौरान यह भयावह सच सामने आया कि आरोपियों ने 33 मासूम लड़कों के साथ ‘एग्रवेटेड पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट’ (गंभीर यौन हमला) जैसे जघन्य अपराध किए थे. इन पीड़ितों में से कुछ की उम्र तो महज तीन साल थी.

केंद्रीय एजेंसी की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यौन हमले के दौरान कई बच्चों के निजी अंगों पर गंभीर चोटें आई थीं. दरिंदगी का आलम यह था कि कुछ बच्चों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा, जबकि कुछ बच्चों की आंखों में इस शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण ‘भेंगापन’ (squint eye) विकसित हो गया था.

IANS/Hindi Post Dot In

 


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