ईरान पर अमेरिका ने किया हमला, असद्दुद्दीन ओवैसी ने दी प्रतिक्रिया, क्या बोले?

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एआईएमआईएम के अध्यक्ष असद्दुद्दीन ओवैसी (फाइल फोटो | आईएएनएस)

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एआईएमआईएम के अध्यक्ष असद्दुद्दीन ओवैसी ने ईरान पर अमेरिकी हमलों को लेकर बयान दिया है. उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरीकी हमले को अंतर्राष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया.

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका इन हमलों के जरिए गाजा में फिलिस्तीनियों के नरसंहार को छिपाने की कोशिश कर रहा है. उनका यह भी मानना है कि ये हमले ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने से नहीं रोक पाएंगे.

ओवैसी ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अमेरिका द्वारा किए गए हमले अंतर्राष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, एनपीटी (परमाणु हथियारों के अप्रसार पर संधि) और अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है.

उन्होंने बताया कि अमेरिकी संविधान के तहत, अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी के बिना अमेरिका युद्ध नहीं छेड़ सकता.

ओवैसी ने इजरायल के परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका के दोहरे मापदंड पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “इजरायल के बारे में कोई बात नहीं कर रहा है. उसके पास 700-800 परमाणु हथियार हैं. उसने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं और वो आईएईए निरीक्षकों को अनुमति नहीं देता है. फिर भी उसके बारे में कोई बात नहीं करता है.”

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष ने भविष्यवाणी की कि ईरान 5-10 साल में 90 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन कर लेगा. उन्होंने कहा, “ईरान को रोका नहीं जा सकता. वह एनपीटी से बाहर निकल जाएगा.”

लोकसभा सांसद का यह भी मानना है कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी हमले के बाद पश्चिम एशिया के मुस्लिम देश इजरायल का मुकाबला करने के लिए परमाणु हथियार बनाने का फैसला करेंगे. उन्होंने कहा, “आप उन्हें रोक नहीं पाएंगे.”

ओवैसी ने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने साफ तौर पर कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं हैं.

पश्चिम एशियाई देशों में रहने वाले 60 लाख भारतीयों पर इस संभावित युद्ध के पड़ने वाले प्रभाव पर ओवैसी ने चिंता व्यक्त की.

पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि वह (पाकिस्तान) ट्रंप के लिए नोबेल पीस पुरस्कार की मांग कर रहा था. ओवैसी ने कहा कि हमें पाकिस्तानियों से पूछना चाहिए कि क्या वे चाहते हैं कि ट्रंप को शांति का नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए. क्या उनके जनरल (पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर) ने इसके लिए ही व्हाइट हाउस में ट्रंप के साथ लंच किया था.

 

Reported By: IANS, Written By: Hindi Post Web Desk


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