गिलियन बैरे सिंड्रोम का बढ़ रहा कहर, अब इस शहर में हुई पहली मौत
अस्पताल की सांकेतिक तस्वीर
मुंबई | गिलियन बैरे सिंड्रोम यानि GBS का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. मुंबई के नायर अस्पताल में भर्ती 53 साल के एक मरीज की जीबीएस के चलते मौत हो गई है. मुंबई में गिलियन बैरे सिंड्रोम से यह पहली मौत है. मरीज वडाला इलाके का रहने वाला था और बीएमसी के बीएन देसाई अस्पताल में वार्ड बॉय के रूप में काम करता था.
नायर अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, मरीज काफी दिनों से बीमार था और उसका इलाज चल रहा था.
वहीं, नायर अस्पताल में एक नाबालिग लड़की भी भर्ती है जिसे जीबीएस वायरस हुआ है. यह लड़की पालघर की रहने वाली है और 10वीं कक्षा की छात्रा है.
इससे पहले 6 फरवरी को भी जीबीएस सिंड्रोम वायरस की चपेट में आने से एक मरीज की मौत हो गई थी.
वहीं, 26 जनवरी को महाराष्ट्र के पुणे में गुलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट का निधन हो गया था. वह डीएसके विश्वा इलाके में रहते थे.
बता दें कि जीबीएस न्योरोलॉजिक बीमारी है. इस बीमारी के लक्षण स्वाइन फ्लू की तरह होते है जिसमें सर्दी, जुकाम और तेज बुखार आता है. इसके कारण मांसपेशियों में कमजोरी हो जाती है और शरीर के अंग सुन्न पड़ जाते हैं. इससे लकवा या कभी-कभी मौत भी हो सकती है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जीबीएस के बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रशासन से मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप और प्रबंधन के लिए सात सदस्यीय टीम तैनात की है जिसमें बहु-विषयक विशेषज्ञ शामिल हैं.
राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दी है कि सामान्य सावधानियां बरतकर जीबीएस को कुछ हद तक रोका जा सकता है जैसे कि उबला हुआ/बोतलबंद पानी पीना, खाने से पहले फलों और सब्जियों को अच्छी तरह से धोना, चिकन और मांस को ठीक से पकाना, कच्चे या अधपके भोजन विशेष रूप से सलाद, अंडे, कबाब या समुद्री भोजन से परहेज करना.
