विनेश का वजन कम करने के लिए रात भर प्रयास किए, उनके बाल भी काटने पड़े और …. : डॉ दिनशॉ पारदीवाला

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पेरिस | भारतीय महिला रेसलर विनेश फोगाट को 50 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती के फाइनल में अयोग्य घोषित करना भारत के लिए एक चौंकाने वाली घटना है. विनेश ने पेरिस ओलंपिक में अपने पहले ही बाउट में शीर्ष वरीयता प्राप्त और टोक्यो 2020 की चैंपियन जापान की युई सुसाकी को हराया. इसके बाद विनेश ने दो और बाउट जीतकर फाइनल में प्रवेश किया. लेकिन फाइनल बाउट से पहले वजन मापन के दौरान विनेश का वजन तय मानक से 100 ग्राम अधिक आया और वह फाइनल में खेलने के लिए अयोग्य घोषित हो गई.

विनेश ने मंगलवार को लगातार तीन बाउट लड़े और तीनों जीते. हालांकि बाउट के दौरान उनका वजन तेजी से बढ़ता पाया गया. इस बात की जानकारी विनेश के साथ पेरिस ओलंपिक में काम कर रहे डॉ दिनशॉ पारदीवाला ने दी.

डॉ दिनशॉ पारदीवाला ने कहा, “विनेश की मेडिकल टीम ने विनेश का वजन कम करने के लिए पूरा प्रयास किया. जब कोई रेसलर अपने सामान्य वजन से निचले भारवर्ग में हिस्सा लेता है तो उसके पास अपेक्षाकृत कमजोर प्रतिद्वंदियों से बाउट करने का एडवांटेज रहता है. लेकिन वजन कम करने में डाइट, वाटर इनटेक और अन्य चीजों का ध्यान रखना पड़ता है. इसके अलावा एथलीट को पसीना भी निकालना होता है.”

उन्होंने कहा, “लाइट वेट कैटेगरी में आने के बाद कमजोरी और एनर्जी में कमी आ जाती है. इसलिए आमतौर पर ऐसे रेसलरों को वजन कराने के बाद एनर्जी फूड पर ध्यान देना होता है. विनेश के तीन बाउट थे, इसलिए उनको डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए कुछ मात्रा में पानी देना पड़ा. हालांकि देखने में आया कि, बाउट के बाद विनेश का वजन सामान्य से अधिक बढ़ रहा था. इसके लिए कोच ने विनेश पर सामान्य ‘वेट कट’ प्रक्रिया शुरू की, और उन्हें पूरा भरोसा था कि रात के बाद विनेश का वजन नियंत्रण में आ जाएगा. हालांकि, सुबह पूरे प्रयास करने के बावजूद यह 100 ग्राम ज्यादा था और विनेश फाइनल बाउट के लिए अयोग्य हो गई.”

डॉ दिनशॉ पारदीवाला ने बताया, “हमने विनेश का वजन कम करने के लिए सब उपाए किए. यहां तक कि विनेश के बाल भी काटे, उनके कपड़ों को भी छोटा किया गया. लेकिन इन सब प्रयासों के बाद बाद भी वजन कम नहीं हो पाया. फिलहाल विनेश को लोकल ओलंपिक हॉस्पिटल में नसों के जरिए तरल पदार्थ दिए जा रहे हैं. उनके सभी पैरामीटर सामान्य हैं. उन्होंने पीटी उषा से भी बात की. वह शारीरिक तौर पर बिल्कुल सामान्य हैं, लेकिन तीसरे ओलंपिक में भी मेडल नहीं जीत पाने का मानसिक कष्ट है.”

आईएएनएस

 


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