आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए 3 अधिकारी : जानिए DSP हुमायूं भट्ट के बारे में जिनकी पिछले साल हुई थी शादी, 26 दिन की है बेटी, पिता भी थे पुलिस में
आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में बुधवार को सेना के दो अधिकारी और जम्मू-कश्मीर पुलिस के डिप्टी SP शहीद हो गए. शहीदों में कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धोनैक और जम्मू-कश्मीर पुलिस के DSP हुमायूं भट्ट के नाम शामिल है.
हमारे वीर सपूतों की शहादत से पूरा देश गमगीन है. वही शहीद अधिकारियों के परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है.
शहीद हुए अधिकारियों को बुधवार शाम को श्रद्धांजलि दी गई. उस समय सब की आंखे नम थी.
श्रीनगर के जिला पुलिस लाइन में सबसे पहले सेवानिवृत्त आईजीपी गुलाम हसन भट्ट ने शहीद डिप्टी SP हुमायूं भट को पुष्पांजलि अर्पित की. गुलाम हसन भट्ट, हुमायूं भट्ट के पिता है.
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्य सचिव अरुण मेहता, डीजीपी दिलबाग सिंह और जम्मू-कश्मीर पुलिस के अन्य सभी वरिष्ठ अधिकारी शहीद अधिकारी को अंतिम सम्मान देने के लिए उनके पिता के पीछे खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे.
ऐसे गमगीन माहौल में गुलाम हसन भट्ट ने दुख और आंसुओं को छिपाकर एक ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी आम तौर पर कोई कल्पना भी नहीं कर सकता.
भट की दृढ़ता, साहस, धैर्य और भावना को देश के प्रत्येक पुलिस प्रशिक्षण स्कूल, कॉलेज और अकादमी में भावी पुलिसकर्मियों के लिए उद्धृत किया जाएगा.
यह पिता एक जीवित किंवदंती बन गए हैं, जो देश के भावी अधिकारियों की पीढ़ियों को प्रेरित करेंगे. पुलिस बल का कर्तव्य है कि वह इस महान पिता के साथ खड़ा रहे.
जेकेपीएस के 2018 बैच के अधिकारी हुमायूं की पिछले साल शादी हुई थी. उनकी पत्नी ने 26 दिन पहले ही बच्चे को जन्म दिया है. किसी भी परिवार के लिए इससे बड़ी त्रासदी नहीं हो सकती है.
हुमायूं अनंतनाग जिले के कोकरनाग इलाके में उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) थे.
वह सुरक्षा अधिकारियों की उस टीम का हिस्सा थे, जो गडोले पर्वतीय क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद वहां गए थे.
आतंकियों के साथ मुठभेड़ में सेना के कर्नल मनप्रीत सिंह, 19 राष्ट्रीय राइफल्स के सीओ मेजर आशीष ढोंचक और डिप्टी एसपी हुमायूं भट्ट आतंकियों की गोलीबारी की चपेट में आ गए.
घायल अधिकारियों को निकालने के लिए पैरा कमांडो ऑपरेशन में शामिल हुए. आतंकवादियों की गोलीबारी और पहाड़ी इलाके की अनिश्चितताओं का सामना करते हुए, घायल अधिकारियों को निकाला गया.
डीजीपी दिलबाग सिंह और एडीजीपी, विजय कुमार ऑपरेशन की निगरानी के लिए घटनास्थल पर पहुंचे. दुर्भाग्य से, तीनों अधिकारियों का बहुत खून बह गया था और डॉक्टरों द्वारा उन्हें बचाया नहीं जा सके.
इन सभी ने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है.
हिंदी पोस्ट वेब डेस्क
(इनपुट्स: आईएएनएस)
