वो ‘पांच वादे’ जिन के बूते कांग्रेस कर्नाटक की सत्ता में कर रही है वापसी
सांकेतिक तस्वीर (आईएएनएस)
बेंगलुरु | कर्नाटक में कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश मिला है. इसके कारण कांग्रेस की सत्ता में वापसी हो रही है.
कांग्रेस को कर्नाटक के लोगों से किए गए पांच वादों का लाभ मिला है. पार्टी नेताओं ने शनिवार को यह बात कही.
224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा के लिए 10 मई को मतदान हुआ था. इस चुनाव में पार्टी के पांच शीर्ष नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
पार्टी के चुनाव घोषणापत्र से लेकर उसके आक्रामक चुनावी अभियान तक, सभी बातों ने दक्षिणी राज्य के लोगों का ध्यान आकर्षित किया.
जी. परमेश्वर, राज्य प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, एम.बी. पाटिल, शशिकांत सेथिल और सुनील कानूगोलू ने पार्टी की भारी जीत सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
2020 में सुरजेवाला को कांग्रेस महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल के स्थान पर कर्नाटक प्रभारी नियुक्त किया गया था, जबकि शक्तिशाली लिंगायत नेता – पाटिल को अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया था.
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक के बाद एक जनसभाओं और पूर्व पार्टी प्रमुख राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की रैलियों और रोड शो से पार्टी की तरफ लोगों का झुकाव हुआ. राज्य में आक्रामक चुनावी अभियान की रूपरेखा तैयार करने के पीछे पाटिल का हाथ था.
उन्होंने चार साल के अंतराल के बाद राज्य में कांग्रेस की पूर्व प्रमुख सोनिया गांधी की जनसभा आयोजित करने के अलावा मतदाताओं को लुभाने के लिए डोर-टू-डोर कैंपेन पर भी ध्यान केंद्रित किया.
पाटिल को सिद्दारमैया का करीबी माना जाता है और इससे पहले उन्होंने राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों को भी संभाला था.
इस बीच, परमेश्वर को घोषणापत्र, नीति और दृष्टि समिति का अध्यक्ष बनाया गया था.
कांग्रेस का चुनावी घोषणापत्र जारी होने के साथ ही चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि इसमें सत्ता में आने पर बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया गया था.
घोषणापत्र ने जल्द ही लोगों का ध्यान आकर्षित किया और कुछ हलकों में इसकी आलोचना भी हुई.
बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने के वादे के अलावा, पार्टी ने अपने घोषणापत्र में चार और महत्वपूर्ण गारंटी की भी घोषणा की – ‘गृह ज्योति’ (200 यूनिट मुफ्त बिजली), ‘गृह लक्ष्मी’ (परिवार की प्रत्येक महिला मुखिया को 2,000 रुपये मासिक भत्ता), ‘अन्न भाग्य’ (बीपीएल परिवार में प्रत्येक व्यक्ति को 10 किलो पसंद का अनाज) और कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम और बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा.
पार्टी के ’40 प्रतिशत कमीशन सरकार’ अभियान ने भी लोगों के बीच पैठ बनाई.
2018 के चुनावों में भाजपा ने 104, कांग्रेस ने 80 और जद (एस) ने 37 सीटें जीती थी. भाजपा के बी.एस. येदियुरप्पा ने सरकार बनाई थी, लेकिन बहुमत परीक्षण से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. फिर, कांग्रेस और जद (एस) ने एक गठबंधन सरकार बनाई थी जो सिर्फ 14 महीने ही चल पाई थी. दरअसल, 16 विधायक भाजपा में चले गए थे. इससे सरकार गिर गई थी. इससे भाजपा सत्ता में वापसी करने में सफल रही थी.
हालांकि, इस बार कांग्रेस दक्षिणी राज्य कर्नाटक में 136 सीटें जीतने में सफल रही है. वही भाजपा और जद (एस) को क्रमश: 65 और 19 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा है.
आईएएनएस
