क्या है स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया? जानिए अविश्वास प्रस्ताव की शर्तें और नियम
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की फाइल फोटो / (क्रेडिट: आईएएनएस)
क्या है स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया ? जानिए अविश्वास प्रस्ताव की शर्तें और नियम
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा है. विपक्षी पार्टियों ने 94 (C) नियम के तहत स्पीकर को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव नोटिस दिया है. बता दें कि विपक्षी पार्टियों ने लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता को बोलने नहीं देने के आरोप में यह कदम उठाया है. ऐसे में सवाल है कि आखिर ये 94 (C) नियम है क्या और लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने का नियम क्या है. तो जानते हैं कैसे स्पीकर को पद से हटाया जा सकता है…
आर्टिकल 94 (C)
लोकसभा के स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को उनके पद से हटाने के लिए संविधान में स्पष्ट प्रक्रिया तय है. लोकसभा अपने कुल मौजूदा सदस्यों के बहुमत से प्रस्ताव पारित करके स्पीकर या डिप्टी स्पीकर को हटा सकती है, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि प्रस्ताव लाने से कम से कम 14 दिन पहले नोटिस दिया गया हो. ऐसा प्रस्ताव लाने के इरादे के बारे में सेक्रेटरी जनरल को लिखकर कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना होता है. नोटिस देने वाला सदस्य नोटिस के 14 दिन बाद दी गई तारीख पर प्रस्ताव लाता है.
अगर अभी की स्थिति से समझें तो विपक्षी पार्टियों ने ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस जारी कर दिया है. अब 14 दिन बाद विपक्षी पार्टियां प्रस्ताव लेकर आएंगी. जब प्रस्ताव आएगा, उसके बाद वोटिंग होगी, जिसमें लोकसभा की इफेक्टिव मेजॉरिटी (यानी खाली सीटों को छोड़कर सदन की कुल मेंबरशिप की मेजॉरिटी) के जरिए फैसला होगा. अगर प्रस्ताव पास होता है तो स्पीकर को हटाया जा सकता है.
नियम के अनुसार, प्रस्ताव पर तभी विचार और चर्चा की जा सकती है जब इसे कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो. जब लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में विचाराधीन होता है, तो वह सदन की बैठक की अध्यक्षता नहीं कर सकता, भले ही वह सदन में मौजूद हो. इस दौरान स्पीकर सदन की कार्यवाही में बोल सकता है और हिस्सा ले सकता है. पहली बार में वोट दे सकता है, हालांकि वोट बराबर होने की स्थिति में ऐसा नहीं किया जा सकता.
बता दें कि लोकसभा के महासचिव को सौंपे गए नोटिस के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही के संचालन से अलग कर लिया है और मंगलवार को वह सदन की कार्यवाही का संचालन करने आसन पर नहीं आए.
