‘प्राइवेट पार्ट पकड़ना रेप की कोशिश नहीं’, इलाहाबाद हाई कोर्ट की इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने …

Supreme Court IANS 222

फाइल फोटो: आईएएनएस

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“प्राइवेट पार्ट पकड़ना रेप की कोशिश नहीं”, इलाहाबाद हाई कोर्ट की इस टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने … 

 

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह निर्णय जिसमें कहा गया था कि महिला के स्तनों को छूना और पायजामे के नाड़े को तोड़ना जैसी हरकतें दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास के आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, फिलहाल स्थगित रहेगा.

शीर्ष न्यायालय ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामले में आरोपियों के खिलाफ ट्रायल भारतीय दंड संहिता (IPC) और पोक्सो एक्ट के तहत दुष्कर्म व दुष्कर्म के प्रयास की धाराओं के अनुसार ही आगे बढ़ेगा, न कि किसी हल्की धारा के तहत.

मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि वह मामले के मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे है. साथ ही यह भी कहा कि आरोपी (अभियुक्त) उच्चतर धाराओं को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र होंगे. कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह यौन अपराध जैसे संवेदनशील मामलों में उच्च न्यायालयों द्वारा की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर व्यापक दिशानिर्देश तैयार करने की ओर अग्रसर है.

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा, “हम उच्च न्यायालयों द्वारा ऐसे मामलों में आवश्यक संवेदनशीलता को लेकर व्यापक दिशानिर्देश जारी करने के इच्छुक हैं. कई बार की गई टिप्पणियां अनदेखी रह जाती हैं और दुर्भाग्यवश पीड़िता व उसका परिवार समझौते के लिए मजबूर हो जाते हैं.”

यह आदेश अदालत द्वारा लिए गए सुओ मोटू मामले में आया है जिसमें पहले से ही उक्त टिप्पणियों पर रोक लगाई गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली एसएलपी (Special Leave Petition) पर भी नोटिस लिया और उसे इसी मामले के साथ संलग्न कर दिया है.

इसके अलावा, कोर्ट ने अमाइकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता से ऐसी अन्य ‘अप्रत्याशित/दुर्भाग्यपूर्ण’ टिप्पणियों के उदाहरण एकत्र कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है जिससे दिशानिर्देश तय करने में सहायता मिल सके.

 

 


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