RBI ने रेपो दर में 0.25 फीसदी की करी कटौती, जानिए EMI पर क्या असर?
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मुंबई | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट में 25 आधार अंक (bps) की कटौती का निर्णय लिया गया है. इसके बाद रेपो रेट 5.5% से घटाकर 5.25% कर दिया गया है. यह कदम अर्थव्यवस्था में विकास को प्रोत्साहन देने के लिए उठाया गया है.
गर्वनर ने यह भी घोषणा की कि RBI अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाने के लिए ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत 1 लाख करोड़ रुपये मूल्य के सरकारी बॉन्ड खरीदेगा. इसके साथ ही 5 बिलियन डॉलर का डॉलर-रुपये स्वैप प्रोग्राम भी लागू किया जाएगा ताकि बाजार में अतिरिक्त तरलता उपलब्ध कराई जा सके.
उन्होंने बताया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर 8.2% दर्ज की गई है, जबकि महंगाई दर घटकर 1.7% तक आ गई है. मल्होत्रा ने इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “गोल्डीलॉक्स पीरियड” बताया. कम मुद्रास्फीति ने रेपो रेट घटाने का अवसर उपलब्ध कराया है. RBI ने वर्ष 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि RBI न्यूट्रल मौद्रिक रुख जारी रखेगा जिसका अर्थ है कि न तो अत्यधिक सख्ती और न ही ढील—दोनों में संतुलन. इससे वृद्धि को समर्थन मिलेगा और मुद्रास्फीति पर भी नियंत्रण बना रहेगा.
RBI गवर्नर के अनुसार, देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 686 अरब डॉलर तक पहुंच गया है जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है. हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने हुए हैं.
गौरतलब है कि अगस्त और अक्टूबर की पिछली दो बैठकों में RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. इससे पहले फरवरी से जून के बीच रेपो रेट 6.5% से घटाकर 5.5% किया गया था. रेपो रेट में कमी और बाजार में बढ़ी तरलता से बैंकों के उधार दरों में गिरावट आती है जिससे उपभोक्ताओं व व्यवसायों को सस्ते कर्ज मिलते हैं और निवेश व मांग में वृद्धि होती है. हालांकि यह प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक ग्राहकों को यह लाभ कितनी जल्दी पास करते हैं.
Hindi Post Web Desk
