भारत की पहली महिला टीचर कौन थी ?, लोग उन पर फेंकते थे पत्थर तब भी वो पढ़ाने जाती थी …

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Photo: IANS

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भारत की पहली महिला टीचर कौन थी ?, लोग उन पर फेंकते थे पत्थर तब भी वो पढ़ाने जाती थी …

 

नई दिल्ली | नारी सशक्तीकरण की प्रतीक और देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की शनिवार को जयंती मनाई जा रही है. उनका जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में हुआ था. उनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था.

उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर वर्ष 1848 में पुणे के भिड़ेवाड़ा में भारत का पहला कन्या विद्यालय स्थापित किया था. यह वो दौर था जब महिलाओं की शिक्षा को संकीर्ण दृष्टि से देखा जाता था और उसका तीव्र विरोध होता था.

सावित्रीबाई ने केवल अध्यापन का कार्य ही नहीं किया, बल्कि पाठ्यक्रम तैयार किए और कविताएं लिखी ताकि महिलाएं ज्ञान अर्जित कर सके.

उनका जीवन साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक था. वह प्रतिदिन विद्यालय जाती थी और एक अतिरिक्त साड़ी साथ रखती थी क्योंकि कट्टरपंथी सोच वाले पुरुष उन पर कीचड़ और पत्थर फेंकते थे. इसके बावजूद वह कभी पीछे नहीं हटीं क्योंकि उन्हें विश्वास था कि भारत का भविष्य उसकी बेटियों की शिक्षा में ही सुरक्षित है.

सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. उन्होंने समाज में शिक्षा, समानता व महिला अधिकारों के लिए सावित्रीबाई फुले के योगदान को याद किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर हम उस अग्रणी समाज सुधारक को स्मरण करते हैं जिन्होंने सेवा और शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव के लिए अपना जीवन समर्पित किया. वह समानता, न्याय और करुणा के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध थीं. उनका मानना था कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे शक्तिशाली साधन है. उन्होंने ज्ञान और अध्ययन के जरिए जिंदगी में परिवर्तन लाने पर जोर दिया. जरूरतमंदों के लिए उनका काम भी सराहनीय है.”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “क्रांतिज्योति’ सावित्रीबाई फुले ने अपने साहस, संघर्ष और दूरदर्शिता से समाज में शिक्षा, समानता व महिला अधिकारों की अलख जगाई. उनका जीवन सामाजिक परिवर्तन और मानवीय गरिमा का प्रतीक है. नारी सशक्तिकरण के लिए आजीवन संघर्षरत रहीं सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि.”

IANS/Hindi Post Dot In


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