बहुत अशुभ रहने वाले हैं आने वाले 5 दिन, पंचक काल में बिलकुल भी न करें ये काम….

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हिंदू धर्म में पंचक का विशेष महत्व है. पंचक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश और अन्य कई शुभ कार्य करने की मनाही होती है. दिसंबर माह में पंचक की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 को शाम 7 बजकर 46 मिनट से होगी और इसका समापन 29 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा. इस बार पंचक की शुरुआत बुधवार को हो रही है इसलिए इसे राज पंचक कहा जाएगा.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से लेकर शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण करता है, तब पंचक काल बनता है. सरल शब्दों में कहें तो धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती—इन पांच नक्षत्रों से चंद्रमा के गुजरने की अवधि को पंचक कहा जाता है. चंद्रमा को इन नक्षत्रों से गुजरने में लगभग पांच दिन लगते हैं, इसी कारण इसका नाम पंचक पड़ा है. इसके अलावा, जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करता है, तब भी पंचक की स्थिति मानी जाती है.

पंचक को आमतौर पर अशुभ समय माना जाता है. इस दौरान कई प्रकार के मांगलिक और निर्माण कार्य वर्जित होते हैं. शास्त्रों के अनुसार, पंचक काल में चारपाई या पलंग बनवाना शुभ नहीं माना जाता. मान्यता है कि ऐसा करने से परिवार में कलह, रोग और संकट बढ़ सकते हैं.

इसके साथ ही पंचक में घास, लकड़ी या अन्य ज्वलनशील वस्तुओं का संग्रह करने से भी बचना चाहिए क्योंकि इससे भविष्य में कार्यों में रुकावट आने की आशंका मानी जाती है. इस अवधि में दक्षिण दिशा की यात्रा करना भी वर्जित बताया गया है. दक्षिण दिशा को यम और पितरों से संबंधित माना जाता है, इसलिए इस दिशा में यात्रा करने से बाधाएं आ सकती हैं.

पंचक काल में घर की छत का निर्माण करना भी अशुभ माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इससे पारिवारिक तनाव और आर्थिक नुकसान हो सकता है. इसके अलावा, शास्त्रों में पंचक के दौरान शय्या (बिस्तर) का निर्माण भी निषिद्ध बताया गया है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का निधन पंचक काल में हो जाए, तो पंचक दोष से बचाव के लिए आटे या कुश से बने पांच पुतले मृतक के साथ रखे जाते हैं. यह परंपरा पंचक दोष के शमन के लिए की जाती है.
इस प्रकार, पंचक के दौरान संयम और शास्त्रीय नियमों का पालन करना शुभ माना गया है.

 

हिंदी पोस्ट वेब डेस्क


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