2026 में शनि की साढ़ेसाती से इस राशि की बढ़ेंगी मुश्किलें, जानिए बचाव के असरदार उपाय

SHANI DEV

सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)

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2026 में शनि की साढ़ेसाती से इस राशि की बढ़ेंगी मुश्किलें, जानिए बचाव के असरदार उपाय

 

नया साल 2026 शुरू हो चुका है और इसके साथ ही ज्योतिषीय गतिविधियों का प्रभाव भी दिखाई देने लगा है. साल के शुरुआती महीने में ही मकर राशि में चतुर्ग्रही योग बन रहा है. इसके अलावा पूरे वर्ष गुरु, राहु-केतु और शनि की चाल भी विशेष प्रभाव डालेगी.

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्म और न्याय का कारक ग्रह माना गया है. शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला ग्रह है और एक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक निवास करता है. इसके बाद वह दूसरी राशि में प्रवेश करता है.

साल 2026 में शनि मीन राशि में ही गोचर करते रहेंगे. ऐसे में इस वर्ष सबसे अधिक प्रभाव मेष राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा. दरअसल, मेष राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव पहले से ही शुरू हो चुका है.

ज्योतिष के अनुसार मेष राशि पर शनि की साढ़ेसाती 29 मार्च 2025 से आरंभ हुई थी, जो साल 2032 तक जारी रहेगी. वर्ष 2026 में साढ़ेसाती का पहला चरण प्रभावी रहेगा, जिसे सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है.

जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चलता है, उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

• आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है
• आय की तुलना में खर्च बढ़ सकते हैं
• मानसिक तनाव और चिंताएं बढ़ सकती हैं
• नए कामों में देरी और बाधाएं आ सकती हैं
• मेहनत के बावजूद अपेक्षित परिणाम देर से मिलते हैं

शनि साढ़ेसाती के अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय

शनि के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय बताए गए हैं—
• शनिवार के दिन छाया दान करें. लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसमें अपना प्रतिबिंब देखें और फिर वह तेल शनि मंदिर में दान करें.
• शनि साढ़ेसाती के समय नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है.
• प्रत्येक शनिवार शनि मंदिर जाकर शनिदेव के दर्शन करें और सरसों का तेल अर्पित करें.
• प्रतिदिन पीपल के पेड़ पर जल अर्पित करें.
• शनिवार के दिन काली उड़द, काले चने और तिल का दान करें.
• हर शनिवार चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालें.
• शनिवार के दिन “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें.
• प्रतिदिन दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें.

इन उपायों को श्रद्धा और नियमितता से करने पर शनि साढ़ेसाती के अशुभ प्रभावों में कमी आती है और जीवन में संतुलन बना रहता है.

डिस्क्लेमर : यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है. किसी भी उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.

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