अगर दिख रहे ‘3पी’ लक्षण तो हो जाएं अलर्ट, कहीं पास तो नहीं आ रहा डायबिटीज का खतरा?

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सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - ChatGPT)

The Hindi Post

नई दिल्ली | डायबिटीज मेलिटस एक मेटाबोलिक डिसऑर्डर है जिसमें रक्त में ग्लूकोज (शुगर) का स्तर लगातार बढ़ा रहता है. इसकी मुख्य वजह इंसुलिन का कम बनना या शरीर का इंसुलिन का सही उपयोग न कर पाना है. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने डायबिटीज मेलिटस के प्रमुख लक्षणों के बारे में जागरूकता फैलाते हुए लोगों से अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करने की अपील की.

मंत्रालय के अनुसार, डायबिटीज एक मेटाबोलिक डिसऑर्डर है जिसमें रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है और यह शरीर को कई तरह से प्रभावित करता है. इसकी समय पर पहचान और जांच से जटिलताओं को रोका जा सकता है. डायबिटीज के सबसे आम और क्लासिकल लक्षणों को ‘तीन पी’ के नाम से जाना जाता है.

इनमें पॉलीयूरिया यानी बार-बार और अधिक मात्रा में पेशाब आना. हाई ब्लड ग्लूकोज के कारण किडनी अतिरिक्त ग्लूकोज को बाहर निकालने की कोशिश करती है जिससे पेशाब बढ़ जाता है. दूसरा है पॉलीडिप्सिया यानी बहुत ज्यादा प्यास लगना. बार-बार पेशाब आने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है जिससे लगातार प्यास महसूस होती है. वहीं, तीसरा है पॉलीफेजिया जिसमें अत्यधिक भूख लगना शामिल है. शरीर को ऊर्जा के लिए ग्लूकोज नहीं मिल पाता, इसलिए भूख बढ़ जाती है लेकिन फिर भी वजन कम होता रहता है.

इनके अलावा अन्य संकेत भी हैं, जैसे बिना किसी वजह के वजन कम होना. लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना.

एक्सपर्ट के अनुसार, अगर ये लक्षण दिखें तो तुरंत ब्लड शुगर जांच करवाएं. शरीर के इन संकेतों को अनदेखा न करें और इसे गंभीरता से लें. डायबिटीज को समय रहते नियंत्रित करने से हृदय रोग, किडनी समस्या, आंखों की परेशानी और नसों के नुकसान जैसी गंभीर शारीरिक समस्याओं से बचा जा सकता है.

डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को पहचानकर जीवनशैली में बदलाव, संतुलित आहार, व्यायाम और आवश्यक दवाओं से इसे अच्छी तरह प्रबंधित किया जा सकता है. आयुष मंत्रालय आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से भी डायबिटीज प्रबंधन पर जोर देता है. नियमित जांच और जागरूकता से राहत मिलती है.

 


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