वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- मुस्लिम लीग के सामने कांग्रेस….
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नई दिल्ली | ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में लोक सभा में आयोजित चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया. पीएम मोदी ने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल राष्ट्रीय चेतना का केंद्र था और 1905 में बंगाल विभाजन के समय वंदे मातरम् ने देश को एकजुट रखने की अद्भुत भूमिका निभाई थी. उन्होंने याद दिलाया कि तब “गली-गली, घर-घर — वंदे मातरम्” राष्ट्रीय संघर्ष का नारा था.
प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने 1905 में ‘इंडियन ओपिनियन’ में लिखा था कि वंदे मातरम् हमारा राष्ट्रीय गीत है और “दुनिया के किसी भी राष्ट्रगीत से अधिक मधुर” है. उन्होंने सवाल उठाया कि इतने सम्मानित गीत के साथ बाद में “अन्याय” कैसे हुआ?
पीएम मोदी ने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि वंदे मातरम् बोलने, छापने या लिखने पर दंड तक दिए जाते थे फिर भी यह गीत जन-आंदोलन की आत्मा बन गया था. उन्होंने सिंध और बारीसाल की उन महिलाओं का भी जिक्र किया जिन्होंने प्रतिबंध हटने तक चूड़ियां न पहनने की प्रतिज्ञा ली थी.
पीएम मोदी ने खुदीराम बोस, मदनलाल ढींगरा, अशफाक उल्लाह खान, रोशन सिंह और राजेंद्र नाथ लाहिड़ी जैसे क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी. इन सभी ने वंदे मातरम का नारा लगाते हुए शहादत दी थी.
पीएम ने मास्टर सूर्य सेन की 1934 में फांसी से पूर्व लिखी पंक्तियों का उल्लेख भी किया जिसमें वंदे मातरम् की प्रतिध्वनि थी.
इसके बाद पीएम मोदी ने वह दौर याद दिलाया जब 1936-37 में मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् पर आपत्ति जताई थी और कहा कि कांग्रेस नेतृत्व दबाव में आ गया था. उन्होंने कहा कि जवाहरलाल नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखकर चेताया था कि गीत की पृष्ठभूमि मुस्लिम समाज को आहत कर सकती है. इसके बाद कांग्रेस ने 1937 की बैठक में वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे स्वीकार किए और बाकी के गीत को सीमित कर दिया.
पीएम मोदी बोले, “कांग्रेस मुस्लिम लीग के दबाव में झुकी. वंदे मातरम् को बांटा और बाद में देश भी बंट गया.” उन्होंने कहा कि आज भी कांग्रेस तुष्टीकरण की मानसिकता से बाहर नहीं निकली है.
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज नई पीढ़ी को बताना जरूरी है कि जिस गीत ने स्वतंत्रता संग्राम को ऊर्जा दी उसके साथ इतिहास में अन्याय हुआ. उन्होंने वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गौरव के रूप में पुनः स्थापित करने का आह्वान किया.
