छात्रों के समर्थन में उतरे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, बार कौंसिल ऑफ इंडिया के हस्तक्षेप पर जताई नाराजगी
CJI सूर्यकांत (फाइल फोटो | आईएएनएस)
छात्रों के समर्थन में उतरे मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, बार कौंसिल ऑफ इंडिया के हस्तक्षेप पर जताई नाराजगी
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के हस्तक्षेप को “पूरी तरह अनावश्यक” करार दिया है. शीर्ष अदालत ने छात्रों को अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया है कि इस मामले में NALSAR या किसी अन्य NLU (नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी) के छात्रों अथवा फैकल्टी के खिलाफ कोई प्रतिकूल या दंडात्मक कार्रवाई न की जाए.
मामले के प्रमुख बिंदु:
विरोध का लोकतांत्रिक अधिकार: CJI ने स्पष्ट किया कि यह मामला अदालत और छात्रों के बीच का संवाद है. मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी करते हुए कहा, “यह मेरे और छात्रों के बीच का संवाद है. इस मुद्दे को उठाने वाले वे कौन होते हैं? यह पूरी तरह से गैर-ज़रूरी है.”
उन्होंने कहा, “युवावस्था में अगर छात्र गलत भी हों तब भी उन्हें विरोध और असहमति जताने का मौलिक अधिकार है. इसमें BCI की कोई भूमिका नहीं है.”
सर्कुलर वापस: सुनवाई के दौरान BCI ने अदालत को सूचित किया कि छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने संबंधी विवादित निर्देश पहले ही वापस लिए जा चुका है. अदालत ने नियामक संस्था को जवाब के लिए दो हफ्ते का समय दिया है.
सुलहकारी पहल: मुख्य न्यायाधीश ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए छात्रों को सुप्रीम कोर्ट बार से जुड़ने और विधिक सहायता (लीगल एड) कार्यक्रमों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया.
विवाद की वजह: यह विवाद NALSAR के छात्रों के एक समूह द्वारा लिखे गए उस पत्र से उपजा है जिसमें उन्होंने दीक्षांत समारोह के लिए सीजेआई सूर्यकांत को दिए गए निमंत्रण का विरोध किया था. छात्रों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों और बर्बरता के दावों पर उनके (सीजेआई के) कथित संज्ञान न लेने का हवाला दिया था.
अपने पत्र में छात्रों ने कहा कि वे ऐसे गणमान्य व्यक्ति से डिग्री लेने में असहज महसूस कर रहे हैं जिनका हालिया सार्वजनिक आचरण प्रदर्शनकारी नागरिकों पर पुलिसिया बर्बरता के गंभीर आरोपों के प्रति उपेक्षापूर्ण और असंवेदनशील प्रतीत हुआ.
आईएएनएस
