1 मई से एटीएम से पैसे निकालना हो जाएगा महंगा, आरबीआई ने शुल्क वृद्धि को दी मंजूरी

सांकेतिक तस्वीर | Pixabay
नई दिल्ली | 1 मई से भारत में एटीएम से पैसे निकालना महंगा होने जा रहा है. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एटीएम इंटरचेंज फीस में वृद्धि को मंजूरी दे दी है. इस कारण एटीएम से पैसे निकालना महंगा हो जाएगा.
इसका मतलब होगा कि वे ग्राहक जो अपने वित्तीय लेनदेन के लिए एटीएम का ही अधिक इस्तेमाल करते हैं उन्हें एक सीमा के बाद एटीएम से पैसे निकालने के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा.
एटीएम इंटरचेंज शुल्क एक बैंक, दूसरे बैंक को एटीएम सेवाएं प्रदान करने के लिए देता है. यह शुल्क प्रत्येक ट्रांजैक्शन के लिए फिक्स्ड राशि होती है और ग्राहकों से ही बैंकिंग लागत के रूप में ली जाती है.
आरबीआई ने एटीएम ऑपरेटरों के अनुरोध के बाद इस शुल्क को रिवाइज करने का फैसला किया है. एटीएम ऑपरेटरों ने तर्क दिया था कि बढ़ते परिचालन व्यय उनके व्यवसाय को प्रभावित कर रहे हैं.
शुल्क में वृद्धि पूरे देश में लागू होगी और इसका असर ग्राहकों, खासकर छोटे बैंकों के ग्राहकों पर पड़ने की उम्मीद है.
1 मई से ग्राहकों को एटीएम से मुफ्त सीमा के बाद प्रत्येक लेनदेन के लिए 2 रुपये अतिरिक्त देने होंगे. एटीएम से नकदी निकालने पर प्रति लेनदेन पर 19 रुपये का खर्च आएगा जो पहले 17 रुपये था.
इसके अलावा, अगर ग्राहक एटीएम का इस्तेमाल पैसे निकालने से अलग दूसरे कामों जैसे बैंलेस पूछताछ के लिए करता है तो 1 रुपये अतिरिक्त देना होगा.
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, खाते की शेष राशि की जांच करने पर अब प्रति लेनदेन 7 रुपये का खर्च आएगा जो वर्तमान में 6 रुपये है.
ऑनलाइन वॉलेट और यूपीआई लेनदेन की सुविधा ने नकद निकासी की जरूरत को काफी कम कर दिया है.
सरकारी डेटा से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2014 में भारत में डिजिटल भुगतान का मूल्य 952 लाख करोड़ रुपये था.
वित्त वर्ष 2023 तक यह आंकड़ा बढ़कर 3,658 लाख करोड़ रुपये तक हो गया, जो कैशलेस लेनदेन की ओर बड़े पैमाने पर बदलाव को दर्शाता है.
इस नई शुल्क वृद्धि के साथ उन ग्राहकों को बोझ महसूस हो सकता है, जो अभी भी नकद लेनदेन पर निर्भर हैं.