पाकिस्तान के पूर्व फौजी अफसर काजी सज्जाद अली जहीर को क्यों मिला पद्मश्री?

Ex Pakistan officer awarded Padma Shri

Photo: Twitter@rashtrapatibhvn (President Of India)

The Hindi Post

नई दिल्ली | भारत सरकार ने पाकिस्तान के पूर्व पैरा-ब्रिगेड सदस्य और अब बांग्लादेशी लेफ्टिनेंट कर्नल काजी सज्जाद अली जहीर (सेवानिवृत्त) को पाकिस्तान के अत्याचारों से बांग्लादेश को मुक्त कराने में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) जहीर, एक पाकिस्तानी सेना अधिकारी थे जो बांग्लादेश की सेना की सेवा के लिए चले गए।

लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) जहीर अब 71 साल के हो गए हैं।

उन्हें वीरता के लिए वीर चक्र के समकक्ष भारतीय बीर प्रतीक और बांग्लादेश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान स्वाधिनाता पदक से सम्मानित किया गया था।

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भारत ने अब उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है। पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में भारत की सफलता में उनके बलिदान और योगदान को मान्यता देते हुए यह सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिया गया है|इसी युद्ध के परिमाण स्वरुप  बांग्लादेश का निर्माण हुआ।

वह 20 साल की उम्र में पाकिस्तान की योजनाओं के दस्तावेजों और नक्शों को साथ लेकर भारत आए थे।

वह सियालकोट सेक्टर में तैनात पाकिस्तानी सेना में एक युवा अधिकारी थे और उसके बाद मार्च 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में क्रूरता और नरसंहार को देखते हुए भारत में प्रवेश कर गए थे।

सीमा पार करते समय उनकी जेब में सिर्फ 20 रुपये थे। शुरू में उन पर पाकिस्तानी जासूस होने का संदेह था।

एक बार जब वह भारत आए, तो उन्हें पठानकोट ले जाया गया, जहां सैन्य अधिकारियों ने उससे और पाकिस्तानी सेना की तैनाती के बारे में पूछताछ की।

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उनको पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) ले जाने के पहले महीनो एक घर में छुपा कर सुरक्षित रखा गया था।

उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान से उनके भागने का कारण यह था कि जिन्ना का पाकिस्तान एक कब्रिस्तान (कब्रिस्तान) बन गया था।

उनके साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाता था, जिनके पास कोई अधिकार नहीं थे ।

आईएएनएस

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