असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के वरिष्ठ नेता कांग्रेस में हुए शामिल
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असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के वरिष्ठ नेता कांग्रेस में हुए शामिल
कानपुर | उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार ने बुधवार को औपचारिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली. नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया. इस अवसर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.
‘AIMIM का असली मुकाबला भाजपा से नहीं, विपक्ष से’
कांग्रेस में शामिल होने के बाद आसिम वकार ने अपनी पूर्व पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि AIMIM भले ही ऊपरी नेतृत्व के स्तर पर बीजेपी का विरोध करती दिखती थी लेकिन असल में उसका मुकाबला कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से है. उन्होंने कहा कि देश के मौजूदा हालात में लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने वाले हर नागरिक का मुख्य लक्ष्य भाजपा को सत्ता से हटाकर एक धर्मनिरपेक्ष सरकार की स्थापना करना है. उन्होंने कहा कि वह ऐसी राजनीति का हिस्सा नहीं बने रह सकते जो विपक्ष को नुकसान पहुंचाए.
असीम वकार ने आज दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय पर कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की..
इस अवसर पर उत्तरप्रदेश के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम,पीसीसी चीफ अजय राय और राज्यसभा सांसद इमरान प्रताप गढ़ी मौजूद रहे! pic.twitter.com/llCK2g3tIc
— Jeetu Besla (@JeetuBesla) September 2, 2026
हुमायूं कबीर पर गंभीर आरोप और जांच की मांग
प्रेस वार्ता के दौरान वकार ने पश्चिम बंगाल के नेता हुमायूं कबीर पर भी तीखा हमला बोला और उन्हें “भाजपा का एजेंट” करार दिया. एक कथित स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि कबीर को 1,100 करोड़ रुपये दिए गए थे. उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धन का स्रोत क्या था और इसका लेन-देन किस उद्देश्य से किया गया.
सपा-कांग्रेस गठबंधन और ओवैसी के लिए झटका
लंबे समय से पार्टी का प्रमुख चेहरा और राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे आसिम वकार का जाना AIMIM और असदुद्दीन ओवैसी के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ गठबंधन को मजबूत करते हुए 2027 के विधानसभा चुनावों में अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल करने की तैयारी में जुटी है.
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