पुलिस की गोली ठीक घुटने के नीचे कैसे लगती है: हाई कोर्ट ने की टिप्पणी, दिए सीबीआई जांच के आदेश

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सांकेतिक तस्वीर (AI Photo - Deposit Photos)

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पुलिस की गोली ठीक घुटने के नीचे कैसे लगती है: हाई कोर्ट ने की टिप्पणी, दिए सीबीआई जांच के आदेश

 

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी पुलिस के कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ के तौर-तरीकों पर बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए श्रावस्ती में हुई एक कथित मुठभेड़ की जांच सीबीआई को सौंप दी है. न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने छोटकऊ उर्फ अलाउद्दीन की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया और सीबीआई को तीन माह में जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया.

कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

अदालत ने कहा कि पुलिस में सोशल मीडिया पर वाहवाही लूटने, वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करने और आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाने के लिए आरोपियों के पैरों में गोली मारने की खतरनाक प्रवृत्ति बढ़ रही है. कोर्ट ने रेखांकित किया कि पुलिस की हर कहानी एक जैसी होती है—अभियुक्त अंधाधुंध फायरिंग करता है लेकिन किसी पुलिसकर्मी को खरोंच तक नहीं आती, जबकि पुलिस की गोली सीधे अभियुक्त के घुटने या पैर में लगती है. कोर्ट ने साफ कहा कि सजा देने का अधिकार सिर्फ न्यायपालिका का है, पुलिस का नहीं.

मुठभेड़ की थ्योरी पर उठे सवाल

मामला 12 मई 2025 का है, जहां इकौना थाना पुलिस ने अपहरण के मामले में छोटकऊ को मुठभेड़ के बाद दोनों पैरों में गोली मारकर गिरफ्तार करना दिखाया था. कोर्ट ने पुलिस की एफआईआर में कई गंभीर विसंगतियां पाईं:

एक गाड़ी में 13 पुलिसकर्मी: एफआईआर में थानाध्यक्ष समेत 13 पुलिसकर्मियों को एक ही सरकारी जीप में गश्त पर दिखाया गया, जिसे कोर्ट ने असंभव माना.

बल प्रयोग का अनुपात: स्वात टीम समेत 23 पुलिसकर्मी मौजूद होने के बावजूद एक देसी कट्टे से लैस आरोपी को काबू में न कर पाने की दलील को कोर्ट ने संदिग्ध पाया.

निशानेबाजी और मेडिकल रिपोर्ट: थानाध्यक्ष का दावा था कि उन्होंने 15 मीटर दूर से अंधेरे में गोली की आवाज सुनकर दो फायर किए और दोनों सीधे आरोपी के पैरों में लगे. कोर्ट ने इस दावे और गोली के आकार से जुड़ी विसंगतियों पर दी गई सफाई को हास्यास्पद करार दिया.

अभियुक्त को पूर्व में छह वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था. हालांकि, वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया था. अदालत ने आशंका जताई कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बौखलाकर पुलिस ने मुठभेड़ की यह फर्जी कहानी गढ़ी हो.

 

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