कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर केंद्र सरकार ने जारी किया यह आदेश
फोटो: आईएएनएस
कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर केंद्र सरकार ने जारी किया यह आदेश
नई दिल्ली | विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के नाम पर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे फर्जी विज्ञापनों एवं भ्रामक घोषणाओं से श्रद्धालुओं को सतर्क रहने की सलाह दी है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रा से जुड़ी सभी आधिकारिक सूचनाएं केवल सरकार के अधिकृत पोर्टल से चेक करे.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा, “यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना. विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा से संबंधित फर्जी विज्ञापन और घोषणाएं ऑनलाइन प्रसारित की जा रही हैं. श्रद्धालु ऐसे भ्रामक दावों और अनधिकृत वेबसाइटों से सावधान रहें.”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय का केवल एक ही आधिकारिक पोर्टल है और यात्रियों को किसी अन्य वेबसाइट, एजेंसी या विज्ञापन के झांसे में नहीं आना चाहिए.
इस बीच, सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के अध्यक्ष लुकेंद्र रासैली ने बताया कि यात्रा का पहला जत्था 11 जून को नई दिल्ली पहुंच गया था. यहां विदेश मंत्रालय की निगरानी में यात्रियों की अनिवार्य चिकित्सीय जांच, शारीरिक फिटनेस परीक्षण, वीजा प्रक्रिया और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं.
पहला जत्था 15 जून को गंगटोक पहुंचेगा. वहां ऊंचाई वाले क्षेत्रों के अनुरूप शरीर को तैयार करने (एक्लिमेटाइजेशन) की प्रक्रिया पूरी करने के बाद श्रद्धालु 20 जून को नाथू ला दर्रे के रास्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश करेंगे.
नाथू ला मार्ग को वर्ष 2015 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के वैकल्पिक मार्ग के रूप में शुरू किया गया था. इस वर्ष लगभग 1,500 आवेदनों में से कंप्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से 500 श्रद्धालुओं का चयन किया गया है. सभी यात्रियों को 50-50 लोगों के 10 अलग-अलग जत्थों में भेजा जाएगा और अंतिम जत्थे के अगस्त में रवाना होने की संभावना है.
गंगटोक पहुंचने के बाद यात्रियों को ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूल बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम से गुजरना होगा. इसके तहत वे पहले 10,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित ‘18 माइल’ केंद्र में दो रात और उसके बाद लगभग 13,000 फीट ऊंचाई पर स्थित हंगू झील क्षेत्र में दो रात बिताएंगे. इस दौरान विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की अंतिम मेडिकल जांच के बाद ही उन्हें 14,140 फीट ऊंचे नाथू ला दर्रे से तिब्बत में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी.
तिब्बत पहुंचने के बाद श्रद्धालु कांगमा, लाजी, झोंगबा और दारचेन होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत की परिक्रमा करेंगे. इस यात्रा में दिरापुक और जुथुलपुक जैसे प्रमुख पड़ाव भी शामिल हैं. पूरी यात्रा 22 दिनों की होगी, जिसमें दिल्ली में दस्तावेजी एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रक्रियाओं के लिए चार दिन, सिक्किम में अनुकूलन के लिए कई दिन तथा तिब्बत में लगभग 12 दिन का प्रवास शामिल रहेगा.
कोविड-19 महामारी और अन्य कारणों से लंबे समय तक स्थगित रहने के बाद वर्ष 2025 में कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू किया गया था. अधिकारियों के अनुसार, इस बार यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवास, चिकित्सा सेवाओं और संचार व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ बनाया गया है.
IANS
कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर फर्जी विज्ञापनों से सावधान रहें यात्री : विदेश मंत्रालय
