प्रतीक यादव की मौत के मामले में हुआ बड़ा डेवलपमेंट
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प्रतीक यादव की मौत के मामले में हुआ बड़ा डेवलपमेंट
लखनऊ | समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव की मौत का मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की दहलीज पर पहुंच गया है. ‘डीके फाउंडेशन’ नाम की एक गैर-सरकारी संस्था (NGO) ने इस मामले में निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की गुहार लगाई है. संस्था ने NHRC में दाखिल शिकायत में दावा किया है कि प्रतीक यादव की मृत्यु सामान्य नहीं है और उनके शरीर पर मिले कथित चोट के निशान (Ante-mortem Injuries) कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
NGO की तीन प्रमुख मांगें –
1. SIT का गठन: हाई-प्रोफाइल मामला होने के कारण तत्काल विशेष जांच दल गठित कर जांच को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखा जाए.
2. CCTV और डिजिटल साक्ष्य: सिविल अस्पताल और संबंधित मार्ग के सभी CCTV फुटेज को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सुरक्षित किया जाए.
3. केंद्रीय फॉरेंसिक जांच: पारदर्शिता के लिए जांच राज्य के बजाय केंद्रीय फॉरेंसिक लैब (CFSL) से कराने की मांग की गई है.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संदेह के घेरे
हालांकि, प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण ‘पल्मोनरी एम्बोलिज्म’ (फेफड़ों में खून का थक्का जमना) बताया गया है लेकिन NGO का तर्क है कि फिटनेस के प्रति सजग रहने वाले व्यक्ति की अचानक मौत और शरीर पर मिले संदिग्ध निशान सामान्य नहीं लगते. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रतीक यादव का मोबाइल, लैपटॉप और डायरी कब्जे में ले ली है और उनके आवास के कुछ कमरों को सील कर दिया गया है.
फिलहाल, विसरा रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो मौत के वास्तविक कारणों पर अंतिम मुहर लगाएगी.
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