डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को बताया था ‘नरक का द्वार’, अब भारत सरकार ने इस पर दी प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को बताया था ‘नरक का द्वार’, अब भारत सरकार ने इस पर दी प्रतिक्रिया
नई दिल्ली | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को नरक का द्वार बताया था. इस पर भारत ने सख्त प्रतिक्रिया दी है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बयान को “बिना जानकारी के, अनुचित और अशोभनीय” बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के मजबूत और आपसी सम्मान पर आधारित रिश्तों को सही ढंग से नहीं दर्शाता.
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने उन टिप्पणियों को देखा है और साथ ही उनके जवाब में अमेरिकी दूतावास द्वारा जारी किए गए बाद के बयान को भी. ये टिप्पणियां स्पष्ट रूप से बिना जानकारी के, अनुचित और खराब सोच वाला कमेंट हैं. ये निश्चित रूप से भारत-अमेरिका संबंधों की वास्तविकता को नहीं दर्शातीं, जो लंबे समय से आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित रहे हैं.”
भारतीय नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जब वह एक कार्यक्रम में जा रही थीं, तब उन्होंने ट्रंप का यह पोस्ट देखा. उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करती हूं कि भारत को ‘नरक’ कहने और ऐसे बयान देने से बचा जाए.”
हडसन इंस्टीट्यूट के एक कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयान ठीक नहीं हैं और इन्हें नजरअंदाज किया जाना चाहिए.
अपने पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप ने एक लंबा संदेश शेयर किया था जिसमें उन्होंने जन्म से नागरिकता मिलने के नियम पर सवाल उठाए थे और कानूनी संस्थाओं, इमिग्रेंट्स और एशियाई-अमेरिकी समुदाय की आलोचना की थी. उन्होंने अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन (एसीएलयू) को “गैंगस्टर आपराधिक संगठन” तक कह दिया था और आरोप लगाया था कि इसने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है.
पोस्ट में यह भी कहा गया कि जन्म से नागरिकता जैसे मुद्दे पर वकीलों के बजाय जनता को फैसला करना चाहिए. उन्होंने लिखा कि इस पर राष्ट्रीय स्तर पर वोट होना चाहिए, न कि कुछ वकील इसका फैसला करें.
इमिग्रेशन को लेकर भी पोस्ट में कई बड़े और विवादित दावे किए गए. इसमें कहा गया कि “यहां जन्म लेने वाला बच्चा तुरंत नागरिक बन जाता है और फिर वह अपने पूरे परिवार को चीन, भारत या किसी और देश से यहां ले आता है.” साथ ही यह भी कहा गया कि “कैलिफोर्निया में गोरे लोगों को नौकरी नहीं मिलती, खासकर हाई-टेक कंपनियों में.”
ट्रंप के इन बयानों की तुरंत आलोचना शुरू हो गई. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कहा कि इस तरह के नस्लभेदी और नफरत भरे बयान भारतीय और चीनी मूल के अमेरिकियों को निशाना बनाते हैं.
ट्रंप के पोस्ट में अमेरिकी कानूनी व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठाए गए. उन्होंने कहा “हम देश के भविष्य का फैसला कुछ वकीलों पर नहीं छोड़ सकते.” उन्होंने यह भी कहा कि संविधान उस समय लिखा गया था जब न हवाई यात्रा थी और न इंटरनेट. इसलिए आज के समय में इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठना चाहिए.
अमेरिका में जन्म से नागरिकता का अधिकार संविधान के 14वें संशोधन के तहत मिलता है. यह मुद्दा लंबे समय से इमिग्रेशन बहस का हिस्सा रहा है. ज्यादातर कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति, उसके माता-पिता की स्थिति चाहे जो भी हो, नागरिकता का हकदार होता है.
IANS
